यह थी मेरी वाली दिवाली और आपकी दिवाली

आज से कुछ दिन बाद ही दिवाली की शोर गूल शुरू हो जाएगी । कह लीजिये छोटे बच्चे पटाखा खरीदने में अभी से मशगूल हो जायेंगे। और माँ की कड़ी हिदायते रहेंगी घर साफ़ हो रहा है तो अब से नॉन -वेज कोई हाथ नही लगाएगा। हाँ दिवाली से किस्सा यूं ही याद आ गया । उम्म। खैर मैं आप लोगो को अपने बचपन में नही ले जाना चाहती हूँ लेकिन मजबूरी है ,वह हमारी नए शहर में पहली दिवाली थी। मेरे लिए हर एक चीज़ नयी थी । नया शहर ,नया घर ,झालर वाली डेकोरेशन ,नए लोग ,नए दोस्त। दोस्त से याद आया “हर्षित ” , मैंने यह नही सोचा था वह मेरे इस आर्टिकल में भी टपक पड़ेगा। जैसे बिन बुलाये दोस्त सेल्फी में। बाकायदा वह हमारे घर पहली बार आया था। मम्मी ने उसे कुछ मिठाइयाँ खाने को दी । पता नही अचानक से बोल पड़ा । “नही आंटी अभी नही खाऊँगा मैं ” यह सुनकर तो बड़ी तेज़ गुस्सा आयी मैं बस यही बरबारा रही थी “बड़ा न आया नही खाने वाला मेरी मम्मी को मना किया”। हुर्र, मैं भी नही पूछने वाली आगे तो। थोड़ी देर वह रुका, फिर मम्मी ने मिठाई के डब्बे दिए । पापा ने मुझे घूरा तो गेट तक छोड़ने को जाना पड़ा । वह गेट से तो निकला पर फिर आगे किसी दलित टोला के ओर मुड़ गया। मैं चौकी और फिर क्या मेरे अंदर शेरलॉक होल्म्स आ चुका था । मैंने भी पीछा करना स्टार्ट किया । वह सीधे एक अम्मा की झोपड़े में घुसा मिठाई के डब्बा उन्हें थमाया और आस पास के बच्चों के साथ आतिशबाजी करने लगा। मैंने चुपचाप अपने कदमो को वापस ले लिया ,तब से हर दिवाली कुछ नया करती हूँ। यह तो थी मेरी दिवाली वाली कहानी। और आपकी ?? What’s your plan ? Comment below.
# this diwali make someone smile 🙂

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