चाची ने बोला कि बिटिया को फेयर-लवली दीजिये | क्या मेरा सांवला रंग एक अभिशाप है ?

सांवली आत्मकथा

 

जी। !! उस समय की बात है

जब मैं महज़ पंद्रह साल की  रही होंगी

प्राकृतिक रूप से कहा जाये तो

वसंत थी वह आयु मेरे लिए

परन्तु !!

रंग सांवला ,पांच फूट कद

ऊपर से तीन बहनो  में

सबसे बड़ी

मेरा कोमल मन बस यही सवाल पूछता था

यह   वरदान है  या  अभिशाप  ??

मेरा सांवला रंग का होना

या फिर लड़की होना ।

 

आज  दिमाग घोड़े से भी तेज़ दौड़ा

एक और सवाल

क्या में एक ऐसी लड़की हूँ  ??

जिसे रंग रूप के मापदंड

पर तौला जाता था

या फिर कमज़ोर

सगे -संबंधियों  के बातों  ने

इतना प्रभावित  कर दिया था

जैसे। !!

आज भी याद है

चाची का वह कथन

बिटिया. ….

को फेयर-लवली दीजिये

औरो उज़्ज़ार हो जायेगी

सुना है भैंसिया भी दूध  के तरह चमकती है ।

शायद !!

कोई इसको भी बियाह ले जाये। !!

उस वक़्त यह कथन इतना न चुभा था

हो सकता है  कोमल मन को समझ ही नही आया हो

या फिर मन  समझाना ही नही चाहता हो।

वह चौराहें की टिपणी आज भी याद है

अरे नीति। .!!

थोड़ी मॉडर्न हो जा। .!!

तुझे भी कोई मिल जायेगा। .

सुन कर।

बस आगे बढ़ जाया करती थी।।

जैसे तैसे तानो के बीच

अठारह वसंत का आगमन हुआ

आगे बढ़ने की बारी आयी

किस्मत से पढाई में थोड़ी कुशल निकली

तो। .!

पिता जी ने आगे पढ़ाने  का फ़ैसला किया

जनाब। .!!

जी। !! अकसर  मधियम परिवार में ऐसा नही होता

पुरे मोहल्ले में हल्ला हो गया

मानो जंगल में किसी ने आग लगा दी हो

अचानक अजन्मे रिश्तेदार भी पैदा हो गए

सलाह की दूकान खुल गए हो मानो

तांती जी। .!!

यह क्या कर रहे है ??

इतने में तो बिटिया का कन्या दान कर

गंगा स्नान कर लीजियेगा।

ऊपर से नीति का रंग तो देखिये

चप्पल घिस जायेगे आपके।

लेकिन भगवान

खुद मेरे अभिवावक के रूप में है

उनको  सत -सत नमन

अब मौसम बदल सा गया है

सही मायनो में वसंत का आगमन हूआ है

उसी चौराहें से आज भी गुज़रती हूँ

वह लड़के कुछ नही बोलते

उसी सावले रंग के साथ

मैं अभिमान से आगे बढ़ जाती हूँ

लेकिन मामी के ताने अब भी बंध नही हुए

लड़की इस लिए पढ़ रहे शायद  अच्छा लड़का मिल जायेगा

मैं मंद -मंद मुस्कराती हूँ

खुद में सोचती हूँ

मामी

आपकी बिटिया की तरह अठारह वर्ष में

विवाहऔर दो बच्चो की माँ

से अच्छा है की अट्ठाईस  तक

अविवाहहित ही रहू।

अब खुद पर नाज़ होता है

अपने सावले रंग पर नाज़ होता है

अपने लड़की होने पर नाज़ होता है।

 

 

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