दिल्ली की सुबह और यु पी की यादें

पता नहीं क्यों आज  सो  नहीं  पाया , 1 मिनट  के  लिए  भी  नहीं |पता  नहीं  दिमाग  में  किस  चीज़  कि  ज़द्दोज़हद  चल  रही  थी, पता  नहीं  मन  में  किस  चीज़  कि  कशमकश  चल  रही  थी |ऐसा  नहीं  कि  मैंने  सोने  कि  कोशिश  नहीं  करी , बहुत  कोशिश  करी  मगर  आँख  थी  कि   बंद  होने  का  नाम  नहीं  ले  रही  थी  |

इसी  ज़द्दोज़हद  और  कसमकश  में  सुबह  के  6 बज  गए  फिर  सोचा  चलो  आज  ऐसा  करते  है  सोते  ही  नहीं  है |फिर  मैं  स्कूटर  पे  निकल  गया   सुबह  का  दिल्ली   देखने | मगर  जैसे  ही  स्कूटर  रोड  तक  आया  मन  में  गाली  दी  कि  साला  ये  दिल्ली  भी  बहुत  अजीब  जगह  है |सुबह  सुबह  भी  सड़को  और  चौराहो  पे  गाड़ियों  कि  लाइन  लगी  हुई  है |क्योंकि  हमारे  यहां  UP में  लोग  सुबह  सुबह  केवल  2-3 काम  ही  करते  है  जैसे , 25-40 के  उम्र  के  लोग  मॉर्निंग  वाक  पे  निकले  होते  है , बुड्ढे  लोग  अपने  कुत्तो  को  potty करवाने  निकले  होते  है  जिसके  साथ  साथ  उनकि  वाक  हो  जाती  है  या  फिर  16-22 साल  के  लड़के  जिनके  घर  वालो  ने  जबरदस्ती  जग  कर  हाथ  में  स्टील  का  डब्बा   पकड़ा  कर  दूध  लेने  भेज  दिया  होता  है |

यु पी की याद क्यूँ आई ?

अगर  UP कि  गलियों  से निकलो तो  सुबह  सुबह  बाजार  कि  तरफ  आओ  तो  सुबह  सुबह  newspaper  वाले  दिख  जाते  थे  जो  अखबारों  के  बीच  में  advertisement वाले पैम्फलेट  फसा  रहे  होते  थे |मगर  मैं  जब  डेल्ही  में  सुबह  सुबह  निकल  तो  मेरेको  सिर्फ  गाड़ियां  ही  दिखी |

लेकिन  जब  मैं  आगे  गया  हाई  क्लास  सोसाइटी  से  आगे  निकल  के  कुछ  मिडिल  क्लास  सोसाइटी  में  गया  तो  हमको  वह  पे   UP वाली  फीलिंग  थोड़ी  बहुत  आना  स्टार्ट  हुई  उस  इलाके  में  ठीक  UP वालो  कि  ही  तरह  बुड्ढे  लोग  वाक  पे  निकले  हुए  थे , वही  newspaper वाले advertisement डाल  रहे  थे , लड़को  के  हाथ  में  दूध  तो  था  मगर  यहां  स्टील  के  बर्तन  कि  बजाय  Mother Dairy कि  पैकेट  थे |

1 चीज़  और  नोटिस  करी  आज  मैंने , कि  यहां  बच्चे  सुबह  स्कूल  जाने  के  लिए  उनके  पेरेंट्स  उनको  बस  तक  छोड़ने  आते  है  , वो  बस  जो  पीली  रंग  की  होती  है  और  उसपर  नीली  पट्टी  पर  स्कूल  का  नाम  लिखा  होता  है  , या  फिर  बच्चे  मेट्रो  स्टेशन  कि  तरफ  जाते  हुए  दिख  जाते  है  जबकि  UP के  शहरो   में  बच्चे  को  3rd क्लास  तक  पेरेंट्स  छोड़ने  आते  है  और  उसके  बाद  वो  खुद  आते  है  और  जब  वो  6th class में  होते  है  to उनकि  पहली  डिमांड  होती  है  कि  अगर  1st आऊंगा  तो  आप  सायकल  दिलाओगे  और  मैं  साइकिल  से  स्कूल  जाऊंगा | यहां  के  बच्चे  क्या  ही समझेंगे  साइकिल  से  स्कूल  जाने  का  सुख   , साइकिल  पे  रेस  लगा  कर  जल्दी  स्कूल  पहुचने  का  सुख , साइकिल  कि  घंटी  बजाकर  स्कूल  जाती  लड़कियों  को  छेड़ना  और  उस  पर  लड़कियों  का   खिलखिला  देना |ये  छोटी  छोटी  चीज़े  कभी  नहीं  समझ  पाएंगे

फिर  थोड़ा  और आगे  गया  तो  आगे  40-45 साल  का  उम्र  का  आदमी  ने  चाय  की  दूकान  लगा  रखी  थी  ठीक  उसी  तरह  जिस  तरह  UP मे होती   थी | सोचा  वह  रुक  सुबह  सुबह  कि  चाय  पी  जाये , जैसे  ही  मैं  वहां   गया  तो  चाय  वाले  भैया  ने  पुछा  कि  “भैयाजी  चाय  पीजिएगा ”|वही  UP वाला  टोन |मैंने  चाय  ली  और  वह  पे  बैठे  लोगो  की  बात  सुनाने  लगा  जो  चाय  कि  चुस्की  के  साथ  साथ  हिंदी  newspaper कि  खबरों  कि  चर्चा  करना | मैं  उनकी  बात  सुन  ही  रहा  था  कि  उतने  में  1 शख्स  बोला  अरे  गुप्ता  जी  क्या  कहते  हो  हिंदुस्तान  को  पाकिस्तान  पे  हमला  कर  देना  चाहिए  तो  गुप्ता  जी  बोलते  है  कि  पाकिस्तान  पे  तो  हमला  हो  चुका  है शर्मा  जी | शर्मा  जी  पूछते  है  वो  कैसे , तो  गुप्ता  जी  बोलते  है  कि  MNS  ने  पाकिस्तान  के  सभी  एक्टर्स  को  बन  कर  दिया  है  तो  पैसा  कमाएंगे  नहीं  , पैसा  कमाएंगे  नहीं  तो  टैक्स  पाय  करेंगे  नहीं  , टैक्स  पाय  करेंगे  नहीं  तो  आतंकियों  को  पैसा  कैसे  जायेगा  |उसी  बीच  में  एक  22 साल  का  लड़का  जो  उस  हिंदी  newspaper का  खेल  वाला  पेज  पढ़  रहा  था  वो   बोला  के हमला  तो  इंडिया  कि क्रिकेट  टीम  ने  भी  कर  दिया , पाकिस्तान  को  हटा  कर  खुद  No1 पे पहुच  गए | मैं  चाय  पीते  पीते  उनकि  बाते  सुन  रहा  था  और  अपने  UP कि  बचपन  याद  करने  लगा  जहाँ   ठीक  इसी  तरह  हम  सारे  दोस्त  लोग  बकचोदी  काटते  थे | आज  बहुत  सालो  बाद  हिंदी  Newspaper पढ़ा  तो  सोचा  अपने रूममेट  को  भी  आज  हिंदी  newspaper पढ़वाऊंगा  तो  मै newspaper  खरीदने  गया  तो  पता  चला  कि  भैया  महंगाई  वाकई  बढ़  गयी  है  ||जो  दैनिक  जागरण  मैं  2 रुपये  में  खरीदता  था  वो  आज  5 रुपया  का  मिलता  है |Newspaper लेकर  मैं  घर  आ  गया |

लेकिन  कुछ  भी  कहो सुबह  सुबह  उठाने  का , बाहर की ठंडी  हवा  खाने  का और  हिंदी  newspaper   पढ़  कर  उसपे चर्चा  करने  का  मज़ा  ही  कुछ  और  है  फिर  वो  चाहे  दिल्ली  हो  या  यु पी

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