ना जाने क्या हुआ समुन्दर में कश्ती बह सी गयी

कुछ अनकही सी बाते अधूरी सी रह गयी

ना तुमने समझा ना मैंने आगे बढ़कर कुछ कहा

हमारी कहानी अधूरी सी रह गयी

ना जाने क्या हुआ समुन्दर में कश्ती बह सी गयी

तूफ़ान में आशयाना उज़र सा गया

मैंने दिल को बहुत मनाया पर ना जाने ??

कहाँ पर बात अनमनी सी रह गयी

तुमने मुड़ कर नही देखा हमने

तुम्हे आवाज़ ही नहीं लगाया

बस यही पर हमारी कहानी अधूरी सी रह गयी

अब भी आते हो साँवली रातों में तारो के साथ

मेरे ख्यालो में पता है

ख्याल भी खोता खोता जा रहा हैं

मुझे पता है तुम गलत थे पर !!

ना जाने तुम्हारी कौन सी बात

मेरे मन में थम सी गयी

दिल खिल सा गया पर अब वह बात खत्म सी हो गई।

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